भागलपुरी कतरनी चुड़ा की खासियत


भागलपुर का कतरनी चुड़ा काफी बिहार का प्रसिद्ध आहार है। इसका स्वाद और सुगंध काफी मनमोहक होता है। इसका स्वाद इतना उत्तम है कि इस चूड़े को दिल्ली स्थित बड़े बड़े गणमान्य नेताओं ने भी इसे सराहा है। सरकार भी कतरनी चुड़ा के महत्व को देखते हुए इसके उत्पादन के लिए कई प्रकार की विशेष योजना चला रही है। कतरनी चुड़ा का उत्पादन मुख्यतः  भागलपुर, बांका व मुंगेर जिले में ही होता है। 

जिन कुछ खास विशष्टिताओं के कारण भागलपुर या अंग प्रदेश की पहचान देश विदेश में है उसमें कतरनी चावल और चूड़ा खास है। दुधिया रंग की छोटी-छोटी मोतियों से दाने देखने में जितनी सुंदर हैं उतनी ही सुगंधित। भागलपुर की मंडी से कतरनी चूड़ा और चावल दिल्ली, बनारस, पटना, लखनऊ सहित दक्षिण भारत के कई शहरों में भी जाता। हालांकि यह चूड़ा वर्ष के हरेक महीने में काफी डिमांड में रहता है, लेकिन मकर संक्रांति में अंग क्षेत्र की कतरनी बिहार का पसंदीदा सौगात माना जाता है।

इस कतरनी चूड़ा में कई लाभदायक खनिज तत्व और औषधीय तत्व भी पाए जाते हैं जो शरीर के लिए काफी लाभदायक होते हैं. इन्हीं विशेष तत्वों के कारण इस चूड़ा में विशेष प्रकार की महक और स्वाद पाया जाता है. भागलपुर और आसपास के जिले  के कई ग्रामीण इलाके में तो गर्भवती महिलाओं को 4-5 महीने प्रत्येक सुबह  कतरनी चूड़ा, दूध और केला का सेवन करवाने का रिवाज आज भी प्रचलन में है, ताकि संतान स्वस्थ व गोरा पैदा हो.  

अगर कोई व्यक्ति कब्ज या पेट में गैस के कारण परेशान हैं तो सुबह या शाम के नाश्ते में कतरनी चूड़ा को भूंज कर एक मुठ्ठी चना या मुंग के साथ सेवन करें. कभी कब्ज या पेट में गैस की शिकायत नहीं होगी.

आम के साथ कतरनी चूड़ा खाने का आनंद ही कुछ और है. बिहार में कतरनी चूड़ा, दूध और आम मिला कर नाश्ता करना बिहार का प्रमुख आहार है. यह काफी स्वादिष्ट लगता है.

मगध सम्राट बिम्बिसार के लिए भेजी जाती थी कतरनी


 अंग क्षेत्र की कतरनी की खुशबू की चर्चा रामायण, बौद्ध ग्रंथ और इतिहास की किताबों में भी है। इतिहासकारों की मानें तो कतरनी मगध समग्राट की थाली में भी परोसी जाती थी। अंग जनपद की विशिष्टताओं पर किताब लिखने वाले पूर्व जनसंपर्क अधिकारी शिव शंकर सिंह पारिजात बताते हैं कि प्रसिद्ध इतिहासकार एनएल डे ने बंगाल एशियाटिक सोसायटी के जर्नल में में अंग पर एक लेख लिखा है जिसमें कहा है यहां एक खास प्रकार के चावल की खेती थी थी जिसकी खुशबू ऐसी थी कि इसे मगध सम्राट बिम्बिसार के लिए अंग जनपद से ले जायी जाती थी।

अंग क्षेत्र में उपजने वाले  कतरनी  पोहा /चिउड़ा की लोकप्रियता की एक झलक आप इन ख़बरों से लगा सकते हैं. कतरनी चूड़ा की मांग पुरे भारत में बड़े बड़े माननीय तक के यहाँ है. यहाँ तक कि अंग क्षेत्र में उपजने वाले इस  कतरनी चूड़ा को भागलपुर के जिला प्रशासन की तरफ से भारत के महामहिम राष्ट्रपति व माननीय प्रधानमंत्री जी के यहाँ भी सन्देश के रूप में भेजा जाता है. 



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